:
Breaking News

प्रशांत किशोर ने छोड़ा पटना का बंगला, अब आश्रम से चलाएंगे जन सुराज का अभियान

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना का पुराना आवास छोड़कर ‘बिहार नव निर्माण आश्रम’ में रहने का फैसला किया है। दरभंगा में उन्होंने बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और बिहार सरकार को लेकर तीखे बयान दिए।

दरभंगा/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में सक्रियता बढ़ाने के बीच जन सुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ा राजनीतिक और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। उन्होंने पटना स्थित अपना पुराना राजनीतिक ठिकाना छोड़ दिया है और अब एक आश्रम से अपनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित करने का ऐलान किया है। दरभंगा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव तक वे “बिहार नव निर्माण आश्रम” में रहकर जन सुराज अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

प्रशांत किशोर का यह फैसला बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल आवास बदलने का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अब खुद को पारंपरिक राजनीति से अलग और जमीनी राजनीति के चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार प्रशांत किशोर अब आईआईटी पटना के पास स्थित “बिहार नव निर्माण आश्रम” में रहेंगे। उन्होंने बताया कि मंगलवार रात उन्होंने पटना स्थित अपना पुराना आवास खाली कर दिया। इससे पहले वे पटना एयरपोर्ट के पास स्थित “शेखपुरा हाउस” से अपनी राजनीतिक गतिविधियां चला रहे थे। यह बंगला जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदय सिंह के परिवार का बताया जाता है।

उदय सिंह का परिवार बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली माना जाता रहा है। ऐसे में प्रशांत किशोर का वहां से हटकर आश्रम में जाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि प्रशांत किशोर अब अपनी राजनीति को पूरी तरह “जन आंदोलन” के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं।

दरभंगा में बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी और पलायन की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन सरकार इसके समाधान में विफल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता बिहार से पलायन रोकने में असफल रहे, वे खुद ही “पलायन” कर गए।

उनका इशारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं और उनके बेटे निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की अटकलों की तरफ माना जा रहा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और लाखों लोग मजबूरी में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग जनता की असली समस्याओं से दूर हो चुके हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आने वाले चुनाव में जाति, धर्म और पैसे के आधार पर वोट न करें। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों और भावनात्मक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता और युवाओं को हुआ है।

उन्होंने कहा कि वोट देते समय लोगों को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए। अगर जनता सिर्फ जाति और धर्म के नाम पर वोट करती रही तो बिहार कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को पैसे या लालच के आधार पर वोट बेचने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ता है।

प्रशांत किशोर ने देश और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। उनके मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है और किसानों को खाद संकट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य में महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है। अगर समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला। प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार देश के सबसे गरीब राज्यों में शामिल है, लेकिन यहां के शासकों की जीवनशैली बेहद आलीशान होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की समस्याओं से ज्यादा दिखावे और राजनीतिक प्रचार पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने कहा कि जब राज्य में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे बड़े मुद्दे मौजूद हों, तब सरकार को जनता के बुनियादी सवालों पर काम करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बिहार की राजनीति अब जनता की वास्तविक जरूरतों से दूर होती जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर लगातार खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक चेहरे के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। “जन सुराज” अभियान के जरिए वे गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं और पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग मॉडल पेश करने का दावा कर रहे हैं।

हालांकि विपक्षी दल और सत्ताधारी गठबंधन दोनों ही उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ लोग उन्हें भविष्य की राजनीति का नया चेहरा मानते हैं, जबकि कई राजनीतिक दल उनके अभियान को सिर्फ राजनीतिक प्रयोग बताते हैं।

फिलहाल आश्रम में रहने के फैसले ने उनकी राजनीति को नया रंग दे दिया है। बिहार की राजनीति में यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता ने सादगी और जनसंपर्क के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की हो, लेकिन प्रशांत किशोर का यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले काफी अहम माना जा रहा है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि “बिहार नव निर्माण आश्रम” से शुरू होने वाला यह नया राजनीतिक अध्याय बिहार की राजनीति में कितना असर डालता है और जनता इसे किस रूप में स्वीकार करती है।

यह भी पढ़ें: • जेडीयू में बढ़ी अंदरूनी हलचल, आनंद मोहन के बयान से बवाल

• बिहार में मौसम का डबल अटैक, कई जिलों में अलर्ट

• TRE-4 को लेकर पटना में अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *